करनाल: जब 31 वर्षीय सरपंच मीनाक्षी रानी ने पदभार संभाला, तो गांव का तालाब कचरा डंपिंग ग्राउंड बन चुका था। तीन साल बाद यह 55 लाख लीटर पानी संग्रहित करता है और 40 सूखे बोरवेल फिर जीवित हुए हैं।
इस परियोजना में मनरेगा फंड, सामुदायिक श्रमदान और राजस्थान के विशेषज्ञों से सीखी गई डी-सिल्टिंग तकनीक का संयोजन रहा।
जिला प्रशासन ने गांव को "जल लर्निंग सेंटर" घोषित किया है, जहां हर शनिवार प्रदेश भर के पंचायत प्रतिनिधि स्टडी टूर पर आते हैं।